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किसान आत्महत्या पर राजनीति शुरू

रायपुर. प्रदेश में किसान आत्महत्या को लेकर राजनीति तेज हो गई है. कई राजनीतिक संगठनों ने राज्य सरकार पर किसान विरोधी होने का आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकार की नीति के चलते कर्ज में डूबे किसानों को बदहाली हालात के चलते आत्महत्या करने को मजबूर होना पड़ रहा है. वहीं दूसरी ओर किसान महासंघ और कांग्रेस किसान भूषण गायकवाड़ आत्महत्या मामले की जांच के अपनी-अपनी जांच समिति गठित कर दी है. किसान महासंघ ने धान के समर्थन मूल्य के लिए विधायकों-सांसदों के घेराव की रणनीति भी तैयार की है.

कांग्रेस ने बनाई जांच समिति: खैरागढ़ स्थित गोपालपुर थाना क्षेत्र के 28 वर्षीय किसान भूषण गायकवाड़ की आत्महत्या पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल का दूसरे दिन रविवार को बयान आया. उन्होंने इस मामले में सरकार को जिम्मेदार बताते हुए किसान विरोधी करार दिया. बघेल ने किसान आत्महत्या की जांच के लिए पूर्व मंत्री धनेश पाटिला की अध्यक्षता में 9 सदस्यीय जांच कमेटी भी बनाई है, जो किसान स्व. गायकवाड़ के परिजनों से जल्द मुलाकात करेगी.

विधायकों को घेरेंगे किसान: धान का समर्थन मूल्य 2100 रुपए और 300 रुपए बोनस, कर्ज माफी सहित अन्य मांगों को लेकर प्रदेश के किसान अब विधायकों को घेरेंगे. दूसरे चरण में भाजपा के सांसदों का घेराव होगा. आगामी मानसून सत्र में विधानसभा का घेराव करने का प्रस्ताव अभी विचाराधीन है. छत्तीसगढ़ किसान मजदूर महासंघ की रविवार को यहां हुई बैठक में आंदोलन की आगे की रणनीति तैयार की गई. महासंघ ने 16 जून को प्रदेशभर के नेशनल और स्टेट हाईवे पर चक्काजाम किया था. महासंघ के संयोजक मंडल के सदस्य डॉ. संकेत ठाकुर ने बताया कि बैठक में मुद्दों पर चर्चा करते हुए निर्णय लिया गया कि राज्य सरकार द्वारा किसानों की मांगों पर किसी तरह विचार नहीं किये जाने की स्थिति में आंदोलन का विस्तार गांव-गांव तक किया जायेगा.

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