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स्टेट बैंक की न्यूनतम जमा की बढ़ी सीमा हटायी जाए

नयी दिल्ली. राज्यसभा में आज मांग की गयी कि सार्वजनिक क्षेत्र के सबसे बड़े भारतीय स्टेट बैंक के बचत खातों में न्यूनतम जमा की बढ़ी सीमा समाप्त करने के लिए सरकार को हस्तक्षेप करना चाहिए. गौरतलब है कि स्टेट बैंक ने बचत खातों में न्यूनतम जमा की राशि 500 रुपए से बढ़ाकर 5000 रुपए कर दी है और इसके नहीं रहने पर उपभोक्ताओं 150 रुपए का जुर्माना देना हाेगा. मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के के. के. राजेश ने सदन में शून्यकाल के दौरान यह मामला उठाते हुए कहा कि स्टेट बैंक के इस निर्णय से 31 करोड बैंक खाता धारक प्रभावित हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि स्टेट बैंक देश का सबसे बडा बैंक है और अन्य सभी बैंक इससे प्रेरित होते हैं. माकपा सदस्य ने कहा कि स्टेट बैंक के इस कदम से आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हो रही है और सरकार का डिजिटल अभियान नकारात्मक रुप से प्रभावित हो रहा है. स्टेट बैंक का यह फैसला सरकार के आश्वासन पर खाता खोलने वालों को जुर्माना लगाने जैसा है. उन्होंने कहा कि स्टेट बैंक को यह फैसला वापस लेने के लिए सरकार को हस्तक्षेप करना चाहिए जिससे आम जनता का भरोसा व्यवस्था पर बना रह सके. राजेश का समर्थन कांग्रेस समेत पूरे विपक्ष तथा अन्नाद्रमुक के सदस्यों ने भी किया.

भारतीय महिला बैंक का होगा स्टेट बैंक में विलय
सरकार ने भारतीय महिला बैंक (बीएमबी) का देश के सबसे बड़े वाणिज्यिक बैंक भारतीय स्टेट बैंक में विलय करने का निर्णय लिया है. आधिकारिक जानकारी के अनुसार, केन्द्र सरकार हर वर्ग, विशेषकर महिलाओं की वित्तीय सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने के प्रति कटिबद्ध है और इसी को ध्यान में रखते हुये यह निर्णय लिया गया है. महिलाओं के साथ ही महिला केन्द्रित उत्पादों को बड़े नेटवर्क एवं कम लागत पर ऋण उपलब्ध कराने को ध्यान में रखते हुये बीएमबी का स्टेट बैंक में विलय किया जा रहा है क्योंकि स्टेट बैंक का नेटवर्क बहुत बड़ा है. इस संबंध में जारी बयान में कहा गया है कि बीएमबी ने तीन वर्ष में महिलाओं को 192 करोड़ रुपये का ऋण दिया है जबकि स्टेट बैंक ने उन्हें 46 हजार करोड़ रुपये का ऋण दिया है. स्टेट बैंक की 20 हजार से अधिक शाखायें हैं और वह महिलाओं को कम दर पर ऋण उपलब्ध करा रहा है. स्टेट बैंक के करीब दो लाख कर्मचारियाें में से 22 फीसदी महिलायें हैं और उसकी 126 शाखायें पूरी तरह से महिला शाखा है जबकि बीएमबी की इस तरह की सिर्फ सात शाखायें है. बयान में कहा गया है कि सरकार सभी की, विशेषकर महिलाओं की वित्तीय सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित कर रही है और इसके लिए कई कार्यक्रम भी शुरू किये गये हैं. प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत ओवरड्राॅफ्ट सुविधा में भी महिलाआें को वरीयता दी गयी है. इसके साथ प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत पिछले वित्त वर्ष में ऋण लेने वालों में 73 फीसदी महिलायेंं थी.

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