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महतारी एक्सप्रेस में प्रसव के दौरान मासूम की मौत

गरियाबंद. लगातार दो घंटे तक फोन करने के बाद भी महतारी एक्सप्रेस के न पहुंचने पर माहौलकोट की एक महिला प्रसव पीड़ा से तड़पती रही. महतारी एक्सप्रेस जब पहुंची, तब तक महिला की हालत बिगड़ चुकी थी और अस्पताल के रास्ते में प्रसव के दौरान बच्चा आधा फंस गया. अस्पताल पहुंचने पर पता चला कि बच्चे की मौत हो चुकी है. मामले में गंभीर पहलू यह भी है कि एम्बुलेंस में सवार पुरुष स्वास्थ्य कर्मी (ईएमटी) को संकोचवश महिला अपने बच्चे के फंस जाने के बारे में नहीं बता पाई. खबर है कि देवभोग स्वास्थ्य केन्द्र पहुंचने के बाद डॉक्टर ने उस बच्चे को बचाने का काफी प्रयास किया, किन्तु वे सफल नहीं हो पाये. हालांकि महिला अब ठीक है, किन्तु उसे इस बात का मलाल है कि एक तो महतारी एक्सप्रेस दो घंटा बाद पहुंची. इस महतारी एक्सप्रेस में जो स्वास्थ्य कर्मी था वह पुरूष था. जिसके चलते वह अपनी समस्या बताने में संकोच करती रही. इस संबंध में डॉक्टर से चर्चा करने पर वे कहते है मितानिन साथ में न होने के कारण रास्ते में बच्चा फंस गया, अस्पताल पहुंचकर ही बच्चे को निकाला गया. अगर ई.एम.टी. को बताते तो भी शायद ये बातें नहीं होती. इस घटना ने एक बार फिर महतारी एक्सप्रेस के कर्मचारियों के व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है. व्यवस्था को कोसती रही महिला देवभोग से 10 किमी दूर स्थित ग्राम माहौलकोट में निवासरत श्रीमती नीरा सोनवानी ने बताया कि उसे सुबह से ही पेट में दर्द शुरू हो गया था. पति ने दो घंटे में कई बार महतारी एक्सप्रेस को फोन किया, किन्तु फोन लगातार व्यस्त रहने के कारण कोई जवाब नहीं आया. दो घंटे की मशक्कत के बाद किसी तरह फोन लग पाया.

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