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मोदी सरकार के शासन में लोकतंत्र सबसे अंधेरे दौर से गुजर रहा है: राहुल

नयी दिल्ली.कांग्रेस ने केन्द्र की मोदी सरकार पर सत्ता की ताकत से लोगों की आजादी को कुचलने का आरोप लगाते हुए आज कहा कि लोकतंत्र इस समय सबसे अंधेरे दौर से गुजर रहा है. कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने अध्यक्ष सोनिया गांधी की अनुपस्थिति में कार्य समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि सत्ता की ताकत के दुरुपयोग से आजादी को कुचलने के सरकार के प्रयासों से ऐसे खतरनाक मंसूबों को शिकस्त देने का पार्टी का संकल्प ही मजबूत होगा. उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार के शासन में लोकतंत्र सबसे अंधेरे दौर से गुजर रहा है. बैठक में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे. गांधी ने कहा कि टेलीविजन चैनलों को सजा दी रही है और उन्हें अपना प्रसारण बंद करने को कहा जा रहा है. सरकार से जवाब मांगने पर विपक्ष के नेताओं को गिरफ्तार किया जा रहा है. गांधी ने मोदी सरकार पर सत्ता के मद में चूर होने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह उन सभी लोगों को खामोश कर देना चाहती है, जो उससे सहमत नहीं हैं. उन्होंने आशंका व्यक्त की कि कई राज्यों में होने वाले चुनावों के मद्देनजर सरकार आगामी महीनों में लोगों को सूचना से वंचित रखने के साथ ही राजनीतिक ध्रुवीकरण का अभियान चला सकती है. ऐसी स्थिति में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को ऐसी कुटिल रणनीतियों को नाकाम करने की जरूरत है. उन्होंने मोदी सरकार पर संसद द्वारा पारित किए भूमि अधिग्रहण अधिनियम और अचल सम्पत्ति कानून तथा महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी कानून जैसी संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के समय की योजनाओं को कमजोर करने का आरोप लगाया और कहा कि मोदी सरकार बहुत गरीब लोगों को मनरेगा के तहत काम न देने के लिए राज्यों के साथ मिलकर प्रचार कर रही है. गांधी ने ‘वन रैंक वन पेंशन’ के फायदे जवानों को नहीं देने और उनकी दिव्यांग पेंशन में कटौती करने के मुद्दे पर भी मोदी सरकार पर बरसते हुए कहा,“हाल के महीनों में हमारे कई जवान हताहत हुए हैं और यह निर्दयी सरकार उन्हें ‘वन रैंक वन पेंशन’ नहीं देकर और दिव्यांग पेंशन में कटौती करके उनके साथ क्रूरतापूर्ण व्यवहार कर रही है. उन्होंने पाकिस्तान के प्रति नीति के लिए भी सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि यह सरकार पाकिस्तान और जम्मू कश्मीर से जुड़े मुद्दों से निपटने में एक अति से दूसरी अति पर जाकर काम कर रही है. उन्होंने पार्टी के नेताओं से संसद के आगामी सत्र में सरकार की विफलताओं को उजागर करने का आग्रह भी किया.

राहुल से पार्टी अध्यक्ष का पद संभालने का आग्रह
कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) के सदस्यों ने सोमवार को सर्वसम्मति से पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी से पार्टी का अध्यक्ष पद संभालने का आग्रह किया. कांग्रेस नेता ए. के. एंटनी ने संवाददाताओं को बताया, “कई पार्टी सदस्यों ने दृढ़ता से अपनी इस भावना को व्यक्त किया कि राहुल गांधी को पार्टी के अध्यक्ष पद की कमान संभाल लेनी चाहिए.” उन्होंने कहा, “वह समय आ गया है जब कांग्रेस को नरेंद्र मोदी सरकार की तानाशाही के खिलाफ अपने सभी संसाधनों का इस्तेमाल कर लामबंद होना चाहिए.” एंटनी ने यह भी कहा कि ऐसा पहली बार है कि सीडब्ल्यूसी बैठक में यह भावना सर्वसम्मति से जगजाहिर हुई है. उन्होंने कहा, “लेकिन, अंतिम फैसला पार्टी अध्यक्ष को ही लेना है.” कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी अस्वस्थ होने की वजह से बैठक में मौजूद नहीं थीं. पार्टी की कमान संभालने के सवालों पर राहुल के जवाब से वाकिफ कराते हुए कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा, “कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी सीडब्ल्यूसी बैठक में मौजूद थे. उन्होंने कहा कि पार्टी और समिति जो भी फैसला लेगी, वह उस चुनौती को उठाने के लिए तैयार हैं.” राहुल गांधी ने कहा कि वह भारत के विचार के लिए लड़ना चाहते हैं और पार्टी कार्यकर्ता जो भी फैसला लेंगे, वह उस भूमिका को निभाने के लिए तैयार हैं. पार्टी में ऐसी मांगें उठती रही हैं कि राहुल गांधी को अपनी मां सोनिया गांधी के हाथ से पार्टी की कमान लेनी चाहिए. सोनिया गांधी 1998 से पार्टी अध्यक्ष हैं. कांग्रेस अध्यक्ष का उनका कार्यकाल पार्टी में किसी भी अध्यक्ष का सबसे लंबा कार्यकाल है.

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