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नक्सल पीड़ित सुकमा तेजी से बन रहा है ‘कैशलेस जिला’

रायपुर. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘कैशलेस समाज’ की परिकल्पना को साकार करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं. राज्य सरकार के इन कदमों का एक सकारात्मक और उत्साहजनक नतीजा सुदूरवर्ती नक्सल पीड़ित आदिवासी बहुल सुकमा जिले में देखा जा रहा है. राज्य सरकार के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि सुकमा अब कैशलेस जिला बनने की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है, जहां बड़ी संख्या में लोग नकदी रहित लेन-देन के लिए प्रदेश सरकार द्वारा स्थापित सामान्य सेवा केन्द्रों (कॉमन सर्विस सेन्टर्स) के कियोस्क सहयोग से करने लगे हैं. राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री के डिजिटल भारत अभियान सफल बनाने के लिए इस प्रकार के कियोस्क की स्थापना प्रदेश के सभी 27 जिलों में की है. दक्षिण छत्तीसगढ़ के अंतिम छोर पर स्थित सुकमा जिले में 38 सामान्य सेवा केन्द्रों (कियोस्क) की स्थापना की है. ये सामान्य सुविधा केन्द्र सुकमा जिले में लोगों को आधार पंजीयन, बिजली बिल भुगतान, रेलवे टिकट बुकिंग, डीटीएच टीव्ही रिचार्जिंग, मोबाइल फोन रिचार्जिंग, जीवन बीमा की प्रीमियम राशि के भुगतान जैसी सुविधाएं आम जनता को दे रहे हैं. इसके लिए भी पाइंट ऑफ सेल (पीओएस) मशीनों का उपयोग किया जा रहा है. अधिकारियों ने बताया कि अब तक शहरी क्षेत्रों में नौ लाख 96 हजार 892 रूपए का लेन-देन सी.एस.सी. वालेट के माध्यम से इन सामान्य सेवा केन्द्रों के जरिये किया जा चुका है. इन सामान्य सेवा केन्द्रों में पाइंट ऑफ सेल (पीओएस) मशीनों के जरिये चार लाख 80 हजार 500 रूपए और ग्रामीण क्षेत्रों में करीब दो लाख 50 हजार रूपए का कैशलेस आहरण अलग-अलग बूथ (कियोस्क) में किया जा चुका है. कियोस्क में पीओएस, चेक और नेट-बैंकिंग के जरिये 31 हजार 459 रूपए का भुगतान हुआ है.

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